🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 243

The Book of the Aftermath · Entry 243 of 270 · type: दोहा/सोरठा

यह रहस्य रघुनाथ कर बेगि न जानइ कोइ। जो जानइ रघुपति कृपाँ सपनेहुँ मोह न होइ।।116(क)।। औरउ ग्यान भगति कर भेद सुनहु सुप्रबीन। जो सुनि होइ राम पद प्रीति सदा अबिछीन।।116(ख)।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 243 (दोहा/सोरठा) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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