🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 242

The Book of the Aftermath · Entry 242 of 270 · type: चौपाई

इहाँ न पच्छपात कछु राखउँ। बेद पुरान संत मत भाषउँ।। मोह न नारि नारि कें रूपा। पन्नगारि यह रीति अनूपा।। माया भगति सुनहु तुम्ह दोऊ। नारि बर्ग जानइ सब कोऊ।। पुनि रघुबीरहि भगति पिआरी। माया खलु नर्तकी बिचारी।। भगतिहि सानुकूल रघुराया। ताते तेहि डरपति अति माया।। राम भगति निरुपम निरुपाधी। बसइ जासु उर सदा अबाधी।। तेहि बिलोकि माया सकुचाई। करि न सकइ कछु निज प्रभुताई।। अस बिचारि जे मुनि बिग्यानी। जाचहीं भगति सकल सुख खानी।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 242 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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