🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 44

The Book of the Aftermath · Entry 44 of 270 · type: दोहा/सोरठा

कहेहु दंडवत प्रभु सैं तुम्हहि कहउँ कर जोरि। बार बार रघुनायकहि सुरति कराएहु मोरि।।19(क)।। अस कहि चलेउ बालिसुत फिरि आयउ हनुमंत। तासु प्रीति प्रभु सन कहि मगन भए भगवंत।।!9(ख)।। कुलिसहु चाहि कठोर अति कोमल कुसुमहु चाहि। चित्त खगेस राम कर समुझि परइ कहु काहि।।19(ग)।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 44 (दोहा/सोरठा) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

Place in the Mānas

Navigation

🪷 जय श्री राम · जय गोस्वामी तुलसीदास 🪷