🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 45

The Book of the Aftermath · Entry 45 of 270 · type: चौपाई

पुनि कृपाल लियो बोलि निषादा। दीन्हे भूषन बसन प्रसादा।। जाहु भवन मम सुमिरन करेहू। मन क्रम बचन धर्म अनुसरेहू।। तुम्ह मम सखा भरत सम भ्राता। सदा रहेहु पुर आवत जाता।। बचन सुनत उपजा सुख भारी। परेउ चरन भरि लोचन बारी।। चरन नलिन उर धरि गृह आवा। प्रभु सुभाउ परिजनन्हि सुनावा।। रघुपति चरित देखि पुरबासी। पुनि पुनि कहहिं धन्य सुखरासी।। राम राज बैंठें त्रेलोका। हरषित भए गए सब सोका।। बयरु न कर काहू सन कोई। राम प्रताप बिषमता खोई।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 45 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

Place in the Mānas

Navigation

🪷 जय श्री राम · जय गोस्वामी तुलसीदास 🪷