🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 43

The Book of the Aftermath · Entry 43 of 270 · type: चौपाई

भरत अनुज सौमित्र समेता। पठवन चले भगत कृत चेता।। अंगद हृदयँ प्रेम नहिं थोरा। फिरि फिरि चितव राम कीं ओरा।। बार बार कर दंड प्रनामा। मन अस रहन कहहिं मोहि रामा।। राम बिलोकनि बोलनि चलनी। सुमिरि सुमिरि सोचत हँसि मिलनी।। प्रभु रुख देखि बिनय बहु भाषी। चलेउ हृदयँ पद पंकज राखी।। अति आदर सब कपि पहुँचाए। भाइन्ह सहित भरत पुनि आए।। तब सुग्रीव चरन गहि नाना। भाँति बिनय कीन्हे हनुमाना।। दिन दस करि रघुपति पद सेवा। पुनि तव चरन देखिहउँ देवा।। पुन्य पुंज तुम्ह पवनकुमारा। सेवहु जाइ कृपा आगारा।। अस कहि कपि सब चले तुरंता। अंगद कहइ सुनहु हनुमंता।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 43 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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