🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 227

The Book of the Aftermath · Entry 227 of 270 · type: दोहा/सोरठा

सुनि बिनती सर्बग्य सिव देखि ब्रिप्र अनुरागु। पुनि मंदिर नभबानी भइ द्विजबर बर मागु।।108(क)।। जौं प्रसन्न प्रभु मो पर नाथ दीन पर नेहु। निज पद भगति देइ प्रभु पुनि दूसर बर देहु।।108(ख)।। तव माया बस जीव जड़ संतत फिरइ भुलान। तेहि पर क्रोध न करिअ प्रभु कृपा सिंधु भगवान।।108(ग)।। संकर दीनदयाल अब एहि पर होहु कृपाल। साप अनुग्रह होइ जेहिं नाथ थोरेहीं काल।।108(घ)।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 227 (दोहा/सोरठा) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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