🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 744

The Book of Childhood · Entry 744 of 760 · type: चौपाई

सब बिधि सबहि समदि नरनाहू। रहा हृदयँ भरि पूरि उछाहू।। जहँ रनिवासु तहाँ पगु धारे। सहित बहूटिन्ह कुअँर निहारे।। लिए गोद करि मोद समेता। को कहि सकइ भयउ सुखु जेता।। बधू सप्रेम गोद बैठारीं। बार बार हियँ हरषि दुलारीं।। देखि समाजु मुदित रनिवासू। सब कें उर अनंद कियो बासू।। कहेउ भूप जिमि भयउ बिबाहू। सुनि हरषु होत सब काहू।। जनक राज गुन सीलु बड़ाई। प्रीति रीति संपदा सुहाई।। बहुबिधि भूप भाट जिमि बरनी। रानीं सब प्रमुदित सुनि करनी।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 744 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

Place in the Mānas

Navigation

🪷 जय श्री राम · जय गोस्वामी तुलसीदास 🪷