🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 689

The Book of Childhood · Entry 689 of 760 · type: छंद

गाथे महामनि मौर मंजुल अंग सब चित चोरहीं। पुर नारि सुर सुंदरीं बरहि बिलोकि सब तिन तोरहीं।। मनि बसन भूषन वारि आरति करहिं मंगल गावहिं। सुर सुमन बरिसहिं सूत मागध बंदि सुजसु सुनावहीं।।1।। कोहबरहिं आने कुँअर कुँअरि सुआसिनिन्ह सुख पाइ कै। अति प्रीति लौकिक रीति लागीं करन मंगल गाइ कै।। लहकौरि गौरि सिखाव रामहि सीय सन सारद कहैं। रनिवासु हास बिलास रस बस जन्म को फलु सब लहैं।।2।। निज पानि मनि महुँ देखिअति मूरति सुरूपनिधान की। चालति न भुजबल्ली बिलोकनि बिरह भय बस जानकी।। कौतुक बिनोद प्रमोदु प्रेमु न जाइ कहि जानहिं अलीं। बर कुअँरि सुंदर सकल सखीं लवाइ जनवासेहि चलीं।।3।। तेहि समय सुनिअ असीस जहँ तहँ नगर नभ आनँदु महा। चिरु जिअहुँ जोरीं चारु चारयो मुदित मन सबहीं कहा।। जोगीन्द्र सिद्ध मुनीस देव बिलोकि प्रभु दुंदुभि हनी। चले हरषि बरषि प्रसून निज निज लोक जय जय जय भनी।।4।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 689 (छंद) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

Place in the Mānas

Navigation

🪷 जय श्री राम · जय गोस्वामी तुलसीदास 🪷