🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 688

The Book of Childhood · Entry 688 of 760 · type: चौपाई

स्याम सरीरु सुभायँ सुहावन। सोभा कोटि मनोज लजावन।। जावक जुत पद कमल सुहाए। मुनि मन मधुप रहत जिन्ह छाए।। पीत पुनीत मनोहर धोती। हरति बाल रबि दामिनि जोती।। कल किंकिनि कटि सूत्र मनोहर। बाहु बिसाल बिभूषन सुंदर।। पीत जनेउ महाछबि देई। कर मुद्रिका चोरि चितु लेई।। सोहत ब्याह साज सब साजे। उर आयत उरभूषन राजे।। पिअर उपरना काखासोती। दुहुँ आँचरन्हि लगे मनि मोती।। नयन कमल कल कुंडल काना। बदनु सकल सौंदर्ज निधाना।। सुंदर भृकुटि मनोहर नासा। भाल तिलकु रुचिरता निवासा।। सोहत मौरु मनोहर माथे। मंगलमय मुकुता मनि गाथे।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 688 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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