🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 676

The Book of Childhood · Entry 676 of 760 · type: चौपाई

सिय सुंदरता बरनि न जाई। लघु मति बहुत मनोहरताई।। आवत दीखि बरातिन्ह सीता।।रूप रासि सब भाँति पुनीता।। सबहि मनहिं मन किए प्रनामा। देखि राम भए पूरनकामा।। हरषे दसरथ सुतन्ह समेता। कहि न जाइ उर आनँदु जेता।। सुर प्रनामु करि बरसहिं फूला। मुनि असीस धुनि मंगल मूला।। गान निसान कोलाहलु भारी। प्रेम प्रमोद मगन नर नारी।। एहि बिधि सीय मंडपहिं आई। प्रमुदित सांति पढ़हिं मुनिराई।। तेहि अवसर कर बिधि ब्यवहारू। दुहुँ कुलगुर सब कीन्ह अचारू।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 676 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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