🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 642

The Book of Childhood · Entry 642 of 760 · type: चौपाई

जनक सुकृत मूरति बैदेही। दसरथ सुकृत रामु धरें देही।। इन्ह सम काँहु न सिव अवराधे। काहिं न इन्ह समान फल लाधे।। इन्ह सम कोउ न भयउ जग माहीं। है नहिं कतहूँ होनेउ नाहीं।। हम सब सकल सुकृत कै रासी। भए जग जनमि जनकपुर बासी।। जिन्ह जानकी राम छबि देखी। को सुकृती हम सरिस बिसेषी।। पुनि देखब रघुबीर बिआहू। लेब भली बिधि लोचन लाहू।। कहहिं परसपर कोकिलबयनीं। एहि बिआहँ बड़ लाभु सुनयनीं।। बड़ें भाग बिधि बात बनाई। नयन अतिथि होइहहिं दोउ भाई।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 642 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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