🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 398

The Book of Childhood · Entry 398 of 760 · type: चौपाई

एक बार भूपति मन माहीं। भै गलानि मोरें सुत नाहीं।। गुर गृह गयउ तुरत महिपाला। चरन लागि करि बिनय बिसाला।। निज दुख सुख सब गुरहि सुनायउ। कहि बसिष्ठ बहुबिधि समुझायउ।। धरहु धीर होइहहिं सुत चारी। त्रिभुवन बिदित भगत भय हारी।। सृंगी रिषहि बसिष्ठ बोलावा। पुत्रकाम सुभ जग्य करावा।। भगति सहित मुनि आहुति दीन्हें। प्रगटे अगिनि चरू कर लीन्हें।। जो बसिष्ठ कछु हृदयँ बिचारा। सकल काजु भा सिद्ध तुम्हारा।। यह हबि बाँटि देहु नृप जाई। जथा जोग जेहि भाग बनाई।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 398 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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