🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 394

The Book of Childhood · Entry 394 of 760 · type: चौपाई

जनि डरपहु मुनि सिद्ध सुरेसा। तुम्हहि लागि धरिहउँ नर बेसा।। अंसन्ह सहित मनुज अवतारा। लेहउँ दिनकर बंस उदारा।। कस्यप अदिति महातप कीन्हा। तिन्ह कहुँ मैं पूरब बर दीन्हा।। ते दसरथ कौसल्या रूपा। कोसलपुरीं प्रगट नरभूपा।। तिन्ह के गृह अवतरिहउँ जाई। रघुकुल तिलक सो चारिउ भाई।। नारद बचन सत्य सब करिहउँ। परम सक्ति समेत अवतरिहउँ।। हरिहउँ सकल भूमि गरुआई। निर्भय होहु देव समुदाई।। गगन ब्रह्मबानी सुनी काना। तुरत फिरे सुर हृदय जुड़ाना।। तब ब्रह्मा धरनिहि समुझावा। अभय भई भरोस जियँ आवा।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 394 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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