🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 263

The Book of the Aftermath · Entry 263 of 270 · type: चौपाई

कहेउँ परम पुनीत इतिहासा। सुनत श्रवन छूटहिं भव पासा।। प्रनत कल्पतरु करुना पुंजा। उपजइ प्रीति राम पद कंजा।। मन क्रम बचन जनित अघ जाई। सुनहिं जे कथा श्रवन मन लाई।। तीर्थाटन साधन समुदाई। जोग बिराग ग्यान निपुनाई।। नाना कर्म धर्म ब्रत दाना। संजम दम जप तप मख नाना।। भूत दया द्विज गुर सेवकाई। बिद्या बिनय बिबेक बड़ाई।। जहँ लगि साधन बेद बखानी। सब कर फल हरि भगति भवानी।। सो रघुनाथ भगति श्रुति गाई। राम कृपाँ काहूँ एक पाई।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 263 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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