🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 248

The Book of the Aftermath · Entry 248 of 270 · type: चौपाई

ग्यान पंथ कृपान कै धारा। परत खगेस होइ नहिं बारा।। जो निर्बिघ्न पंथ निर्बहई। सो कैवल्य परम पद लहई।। अति दुर्लभ कैवल्य परम पद। संत पुरान निगम आगम बद।। राम भजत सोइ मुकुति गोसाई। अनइच्छित आवइ बरिआई।। जिमि थल बिनु जल रहि न सकाई। कोटि भाँति कोउ करै उपाई।। तथा मोच्छ सुख सुनु खगराई। रहि न सकइ हरि भगति बिहाई।। अस बिचारि हरि भगत सयाने। मुक्ति निरादर भगति लुभाने।। भगति करत बिनु जतन प्रयासा। संसृति मूल अबिद्या नासा।। भोजन करिअ तृपिति हित लागी। जिमि सो असन पचवै जठरागी।। असि हरिभगति सुगम सुखदाई। को अस मूढ़ न जाहि सोहाई।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 248 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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