🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 207

The Book of the Aftermath · Entry 207 of 270 · type: चौपाई

नारि बिबस नर सकल गोसाई। नाचहिं नट मर्कट की नाई।। सूद्र द्विजन्ह उपदेसहिं ग्याना। मेलि जनेऊ लेहिं कुदाना।। सब नर काम लोभ रत क्रोधी। देव बिप्र श्रुति संत बिरोधी।। गुन मंदिर सुंदर पति त्यागी। भजहिं नारि पर पुरुष अभागी।। सौभागिनीं बिभूषन हीना। बिधवन्ह के सिंगार नबीना।। गुर सिष बधिर अंध का लेखा। एक न सुनइ एक नहिं देखा।। हरइ सिष्य धन सोक न हरई। सो गुर घोर नरक महुँ परई।। मातु पिता बालकन्हि बोलाबहिं। उदर भरै सोइ धर्म सिखावहिं।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 207 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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