🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 199

The Book of the Aftermath · Entry 199 of 270 · type: चौपाई

गरुड़ गिरा सुनि हरषेउ कागा। बोलेउ उमा परम अनुरागा।। धन्य धन्य तव मति उरगारी। प्रस्न तुम्हारि मोहि अति प्यारी।। सुनि तव प्रस्न सप्रेम सुहाई। बहुत जनम कै सुधि मोहि आई।। सब निज कथा कहउँ मैं गाई। तात सुनहु सादर मन लाई।। जप तप मख सम दम ब्रत दाना। बिरति बिबेक जोग बिग्याना।। सब कर फल रघुपति पद प्रेमा। तेहि बिनु कोउ न पावइ छेमा।। एहि तन राम भगति मैं पाई। ताते मोहि ममता अधिकाई।। जेहि तें कछु निज स्वारथ होई। तेहि पर ममता कर सब कोई।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 199 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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