🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 195

The Book of the Aftermath · Entry 195 of 270 · type: चौपाई

सुनि भुसुंडि के बचन सुहाए। हरषित खगपति पंख फुलाए।। नयन नीर मन अति हरषाना। श्रीरघुपति प्रताप उर आना।। पाछिल मोह समुझि पछिताना। ब्रह्म अनादि मनुज करि माना।। पुनि पुनि काग चरन सिरु नावा। जानि राम सम प्रेम बढ़ावा।। गुर बिनु भव निधि तरइ न कोई। जौं बिरंचि संकर सम होई।। संसय सर्प ग्रसेउ मोहि ताता। दुखद लहरि कुतर्क बहु ब्राता।। तव सरूप गारुड़ि रघुनायक। मोहि जिआयउ जन सुखदायक।। तव प्रसाद मम मोह नसाना। राम रहस्य अनूपम जाना।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 195 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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