🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 186

The Book of the Aftermath · Entry 186 of 270 · type: चौपाई

मैं पुनि अवध रहेउँ कछु काला। देखेउँ बालबिनोद रसाला।। राम प्रसाद भगति बर पायउँ। प्रभु पद बंदि निजाश्रम आयउँ।। तब ते मोहि न ब्यापी माया। जब ते रघुनायक अपनाया।। यह सब गुप्त चरित मैं गावा। हरि मायाँ जिमि मोहि नचावा।। निज अनुभव अब कहउँ खगेसा। बिनु हरि भजन न जाहि कलेसा।। राम कृपा बिनु सुनु खगराई। जानि न जाइ राम प्रभुताई।। जानें बिनु न होइ परतीती। बिनु परतीति होइ नहिं प्रीती।। प्रीति बिना नहिं भगति दिढ़ाई। जिमि खगपति जल कै चिकनाई।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 186 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

Place in the Mānas

Navigation

🪷 जय श्री राम · जय गोस्वामी तुलसीदास 🪷