🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 182

The Book of the Aftermath · Entry 182 of 270 · type: चौपाई

एक पिता के बिपुल कुमारा। होहिं पृथक गुन सील अचारा।। कोउ पंडिंत कोउ तापस ग्याता। कोउ धनवंत सूर कोउ दाता।। कोउ सर्बग्य धर्मरत कोई। सब पर पितहि प्रीति सम होई।। कोउ पितु भगत बचन मन कर्मा। सपनेहुँ जान न दूसर धर्मा।। सो सुत प्रिय पितु प्रान समाना। जद्यपि सो सब भाँति अयाना।। एहि बिधि जीव चराचर जेते। त्रिजग देव नर असुर समेते।। अखिल बिस्व यह मोर उपाया। सब पर मोहि बराबरि दाया।। तिन्ह महँ जो परिहरि मद माया। भजै मोहि मन बच अरू काया।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 182 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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