🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 178

The Book of the Aftermath · Entry 178 of 270 · type: चौपाई

एवमस्तु कहि रघुकुलनायक। बोले बचन परम सुखदायक।। सुनु बायस तैं सहज सयाना। काहे न मागसि अस बरदाना।। सब सुख खानि भगति तैं मागी। नहिं जग कोउ तोहि सम बड़भागी।। जो मुनि कोटि जतन नहिं लहहीं। जे जप जोग अनल तन दहहीं।। रीझेउँ देखि तोरि चतुराई। मागेहु भगति मोहि अति भाई।। सुनु बिहंग प्रसाद अब मोरें। सब सुभ गुन बसिहहिं उर तोरें।। भगति ग्यान बिग्यान बिरागा। जोग चरित्र रहस्य बिभागा।। जानब तैं सबही कर भेदा। मम प्रसाद नहिं साधन खेदा।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 178 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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