🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 176

The Book of the Aftermath · Entry 176 of 270 · type: चौपाई

ग्यान बिबेक बिरति बिग्याना। मुनि दुर्लभ गुन जे जग नाना।। आजु देउँ सब संसय नाहीं। मागु जो तोहि भाव मन माहीं।। सुनि प्रभु बचन अधिक अनुरागेउँ। मन अनुमान करन तब लागेऊँ।। प्रभु कह देन सकल सुख सही। भगति आपनी देन न कही।। भगति हीन गुन सब सुख ऐसे। लवन बिना बहु बिंजन जैसे।। भजन हीन सुख कवने काजा। अस बिचारि बोलेउँ खगराजा।। जौं प्रभु होइ प्रसन्न बर देहू। मो पर करहु कृपा अरु नेहू।। मन भावत बर मागउँ स्वामी। तुम्ह उदार उर अंतरजामी।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 176 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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