🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 174

The Book of the Aftermath · Entry 174 of 270 · type: चौपाई

देखि चरित यह सो प्रभुताई। समुझत देह दसा बिसराई।। धरनि परेउँ मुख आव न बाता। त्राहि त्राहि आरत जन त्राता।। प्रेमाकुल प्रभु मोहि बिलोकी। निज माया प्रभुता तब रोकी।। कर सरोज प्रभु मम सिर धरेऊ। दीनदयाल सकल दुख हरेऊ।। कीन्ह राम मोहि बिगत बिमोहा। सेवक सुखद कृपा संदोहा।। प्रभुता प्रथम बिचारि बिचारी। मन महँ होइ हरष अति भारी।। भगत बछलता प्रभु कै देखी। उपजी मम उर प्रीति बिसेषी।। सजल नयन पुलकित कर जोरी। कीन्हिउँ बहु बिधि बिनय बहोरी।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 174 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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