🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 170

The Book of the Aftermath · Entry 170 of 270 · type: चौपाई

लोक लोक प्रति भिन्न बिधाता। भिन्न बिष्नु सिव मनु दिसित्राता।। नर गंधर्ब भूत बेताला। किंनर निसिचर पसु खग ब्याला।। देव दनुज गन नाना जाती। सकल जीव तहँ आनहि भाँती।। महि सरि सागर सर गिरि नाना। सब प्रपंच तहँ आनइ आना।। अंडकोस प्रति प्रति निज रुपा। देखेउँ जिनस अनेक अनूपा।। अवधपुरी प्रति भुवन निनारी। सरजू भिन्न भिन्न नर नारी।। दसरथ कौसल्या सुनु ताता। बिबिध रूप भरतादिक भ्राता।। प्रति ब्रह्मांड राम अवतारा। देखउँ बालबिनोद अपारा।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 170 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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