🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 164

The Book of the Aftermath · Entry 164 of 270 · type: चौपाई

एतना मन आनत खगराया। रघुपति प्रेरित ब्यापी माया।। सो माया न दुखद मोहि काहीं। आन जीव इव संसृत नाहीं।। नाथ इहाँ कछु कारन आना। सुनहु सो सावधान हरिजाना।। ग्यान अखंड एक सीताबर। माया बस्य जीव सचराचर।। जौं सब कें रह ग्यान एकरस। ईस्वर जीवहि भेद कहहु कस।। माया बस्य जीव अभिमानी। ईस बस्य माया गुनखानी।। परबस जीव स्वबस भगवंता। जीव अनेक एक श्रीकंता।। मुधा भेद जद्यपि कृत माया। बिनु हरि जाइ न कोटि उपाया।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 164 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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