🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 160

The Book of the Aftermath · Entry 160 of 270 · type: चौपाई

कहइ भसुंड सुनहु खगनायक। रामचरित सेवक सुखदायक।। नृपमंदिर सुंदर सब भाँती। खचित कनक मनि नाना जाती।। बरनि न जाइ रुचिर अँगनाई। जहँ खेलहिं नित चारिउ भाई।। बालबिनोद करत रघुराई। बिचरत अजिर जननि सुखदाई।। मरकत मृदुल कलेवर स्यामा। अंग अंग प्रति छबि बहु कामा।। नव राजीव अरुन मृदु चरना। पदज रुचिर नख ससि दुति हरना।। ललित अंक कुलिसादिक चारी। नूपुर चारू मधुर रवकारी।। चारु पुरट मनि रचित बनाई। कटि किंकिन कल मुखर सुहाई।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 160 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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