🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 158

The Book of the Aftermath · Entry 158 of 270 · type: चौपाई

राम कृपा आपनि जड़ताई। कहउँ खगेस सुनहु मन लाई।। जब जब राम मनुज तनु धरहीं। भक्त हेतु लीला बहु करहीं।। तब तब अवधपुरी मैं ज़ाऊँ। बालचरित बिलोकि हरषाऊँ।। जन्म महोत्सव देखउँ जाई। बरष पाँच तहँ रहउँ लोभाई।। इष्टदेव मम बालक रामा। सोभा बपुष कोटि सत कामा।। निज प्रभु बदन निहारि निहारी। लोचन सुफल करउँ उरगारी।। लघु बायस बपु धरि हरि संगा। देखउँ बालचरित बहुरंगा।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 158 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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