🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 156

The Book of the Aftermath · Entry 156 of 270 · type: चौपाई

सुनु खगेस रघुपति प्रभुताई। कहउँ जथामति कथा सुहाई।। जेहि बिधि मोह भयउ प्रभु मोही। सोउ सब कथा सुनावउँ तोही।। राम कृपा भाजन तुम्ह ताता। हरि गुन प्रीति मोहि सुखदाता।। ताते नहिं कछु तुम्हहिं दुरावउँ। परम रहस्य मनोहर गावउँ।। सुनहु राम कर सहज सुभाऊ। जन अभिमान न राखहिं काऊ।। संसृत मूल सूलप्रद नाना। सकल सोक दायक अभिमाना।। ताते करहिं कृपानिधि दूरी। सेवक पर ममता अति भूरी।। जिमि सिसु तन ब्रन होइ गोसाई। मातु चिराव कठिन की नाईं।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 156 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

Place in the Mānas

Navigation

🪷 जय श्री राम · जय गोस्वामी तुलसीदास 🪷