🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 148

The Book of the Aftermath · Entry 148 of 270 · type: चौपाई

बोलेउ काकभसुंड बहोरी। नभग नाथ पर प्रीति न थोरी।। सब बिधि नाथ पूज्य तुम्ह मेरे। कृपापात्र रघुनायक केरे।। तुम्हहि न संसय मोह न माया। मो पर नाथ कीन्ह तुम्ह दाया।। पठइ मोह मिस खगपति तोही। रघुपति दीन्हि बड़ाई मोही।। तुम्ह निज मोह कही खग साईं। सो नहिं कछु आचरज गोसाईं।। नारद भव बिरंचि सनकादी। जे मुनिनायक आतमबादी।। मोह न अंध कीन्ह केहि केही। को जग काम नचाव न जेही।। तृस्नाँ केहि न कीन्ह बौराहा। केहि कर हृदय क्रोध नहिं दाहा।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 148 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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