🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 146

The Book of the Aftermath · Entry 146 of 270 · type: चौपाई

देखि चरित अति नर अनुसारी। भयउ हृदयँ मम संसय भारी।। सोइ भ्रम अब हित करि मैं माना। कीन्ह अनुग्रह कृपानिधाना।। जो अति आतप ब्याकुल होई। तरु छाया सुख जानइ सोई।। जौं नहिं होत मोह अति मोही। मिलतेउँ तात कवन बिधि तोही।। सुनतेउँ किमि हरि कथा सुहाई। अति बिचित्र बहु बिधि तुम्ह गाई।। निगमागम पुरान मत एहा। कहहिं सिद्ध मुनि नहिं संदेहा।। संत बिसुद्ध मिलहिं परि तेही। चितवहिं राम कृपा करि जेही।। राम कृपाँ तव दरसन भयऊ। तव प्रसाद सब संसय गयऊ।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 146 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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