🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 140

The Book of the Aftermath · Entry 140 of 270 · type: चौपाई

कहि दंडक बन पावनताई। गीध मइत्री पुनि तेहिं गाई।। पुनि प्रभु पंचवटीं कृत बासा। भंजी सकल मुनिन्ह की त्रासा।। पुनि लछिमन उपदेस अनूपा। सूपनखा जिमि कीन्हि कुरूपा।। खर दूषन बध बहुरि बखाना। जिमि सब मरमु दसानन जाना।। दसकंधर मारीच बतकहीं। जेहि बिधि भई सो सब तेहिं कही।। पुनि माया सीता कर हरना। श्रीरघुबीर बिरह कछु बरना।। पुनि प्रभु गीध क्रिया जिमि कीन्ही। बधि कबंध सबरिहि गति दीन्ही।। बहुरि बिरह बरनत रघुबीरा। जेहि बिधि गए सरोबर तीरा।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 140 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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