🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 138

The Book of the Aftermath · Entry 138 of 270 · type: चौपाई

बहुरि राम अभिषेक प्रसंगा। पुनि नृप बचन राज रस भंगा।। पुरबासिन्ह कर बिरह बिषादा। कहेसि राम लछिमन संबादा।। बिपिन गवन केवट अनुरागा। सुरसरि उतरि निवास प्रयागा।। बालमीक प्रभु मिलन बखाना। चित्रकूट जिमि बसे भगवाना।। सचिवागवन नगर नृप मरना। भरतागवन प्रेम बहु बरना।। करि नृप क्रिया संग पुरबासी। भरत गए जहँ प्रभु सुख रासी।। पुनि रघुपति बहु बिधि समुझाए। लै पादुका अवधपुर आए।। भरत रहनि सुरपति सुत करनी। प्रभु अरु अत्रि भेंट पुनि बरनी।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 138 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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