🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 136

The Book of the Aftermath · Entry 136 of 270 · type: चौपाई

सुनहु तात जेहि कारन आयउँ। सो सब भयउ दरस तव पायउँ।। देखि परम पावन तव आश्रम। गयउ मोह संसय नाना भ्रम।। अब श्रीराम कथा अति पावनि। सदा सुखद दुख पुंज नसावनि।। सादर तात सुनावहु मोही। बार बार बिनवउँ प्रभु तोही।। सुनत गरुड़ कै गिरा बिनीता। सरल सुप्रेम सुखद सुपुनीता।। भयउ तासु मन परम उछाहा। लाग कहै रघुपति गुन गाहा।। प्रथमहिं अति अनुराग भवानी। रामचरित सर कहेसि बखानी।। पुनि नारद कर मोह अपारा। कहेसि बहुरि रावन अवतारा।। प्रभु अवतार कथा पुनि गाई। तब सिसु चरित कहेसि मन लाई।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 136 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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