🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 134

The Book of the Aftermath · Entry 134 of 270 · type: चौपाई

गयउ गरुड़ जहँ बसइ भुसुंडा। मति अकुंठ हरि भगति अखंडा।। देखि सैल प्रसन्न मन भयऊ। माया मोह सोच सब गयऊ।। करि तड़ाग मज्जन जलपाना। बट तर गयउ हृदयँ हरषाना।। बृद्ध बृद्ध बिहंग तहँ आए। सुनै राम के चरित सुहाए।। कथा अरंभ करै सोइ चाहा। तेही समय गयउ खगनाहा।। आवत देखि सकल खगराजा। हरषेउ बायस सहित समाजा।। अति आदर खगपति कर कीन्हा। स्वागत पूछि सुआसन दीन्हा।। करि पूजा समेत अनुरागा। मधुर बचन तब बोलेउ कागा।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 134 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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