🪷 Rāmcharitamānas · Uttara-Kāṇḍa · Entry 13

The Book of the Aftermath · Entry 13 of 270 · type: छंद

राजीव लोचन स्त्रवत जल तन ललित पुलकावलि बनी। अति प्रेम हृदयँ लगाइ अनुजहि मिले प्रभु त्रिभुअन धनी।। प्रभु मिलत अनुजहि सोह मो पहिं जाति नहिं उपमा कही। जनु प्रेम अरु सिंगार तनु धरि मिले बर सुषमा लही।।1।। बूझत कृपानिधि कुसल भरतहि बचन बेगि न आवई। सुनु सिवा सो सुख बचन मन ते भिन्न जान जो पावई।। अब कुसल कौसलनाथ आरत जानि जन दरसन दियो। बूड़त बिरह बारीस कृपानिधान मोहि कर गहि लियो।।2।।
— Rāmcharitamānas Uttara-Kāṇḍa entry 13 (छंद) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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