🪷 Rāmcharitamānas · Laṅkā-Kāṇḍa · Entry 264

The Book of Laṅkā (the Yuddha) · Entry 264 of 273 · type: चौपाई

करि बिनती जब संभु सिधाए। तब प्रभु निकट बिभीषनु आए।। नाइ चरन सिरु कह मृदु बानी। बिनय सुनहु प्रभु सारँगपानी।। सकुल सदल प्रभु रावन मार् यो। पावन जस त्रिभुवन बिस्तार् यो।। दीन मलीन हीन मति जाती। मो पर कृपा कीन्हि बहु भाँती।। अब जन गृह पुनीत प्रभु कीजे। मज्जनु करिअ समर श्रम छीजे।। देखि कोस मंदिर संपदा। देहु कृपाल कपिन्ह कहुँ मुदा।। सब बिधि नाथ मोहि अपनाइअ। पुनि मोहि सहित अवधपुर जाइअ।। सुनत बचन मृदु दीनदयाला। सजल भए द्वौ नयन बिसाला।।
— Rāmcharitamānas Laṅkā-Kāṇḍa entry 264 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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