🪷 Rāmcharitamānas · Laṅkā-Kāṇḍa · Entry 241

The Book of Laṅkā (the Yuddha) · Entry 241 of 273 · type: चौपाई

आइ बिभीषन पुनि सिरु नायो। कृपासिंधु तब अनुज बोलायो।। तुम्ह कपीस अंगद नल नीला। जामवंत मारुति नयसीला।। सब मिलि जाहु बिभीषन साथा। सारेहु तिलक कहेउ रघुनाथा।। पिता बचन मैं नगर न आवउँ। आपु सरिस कपि अनुज पठावउँ।। तुरत चले कपि सुनि प्रभु बचना। कीन्ही जाइ तिलक की रचना।। सादर सिंहासन बैठारी। तिलक सारि अस्तुति अनुसारी।। जोरि पानि सबहीं सिर नाए। सहित बिभीषन प्रभु पहिं आए।। तब रघुबीर बोलि कपि लीन्हे। कहि प्रिय बचन सुखी सब कीन्हे।।
— Rāmcharitamānas Laṅkā-Kāṇḍa entry 241 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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