🪷 Rāmcharitamānas · Laṅkā-Kāṇḍa · Entry 239

The Book of Laṅkā (the Yuddha) · Entry 239 of 273 · type: चौपाई

मंदोदरी बचन सुनि काना। सुर मुनि सिद्ध सबन्हि सुख माना।। अज महेस नारद सनकादी। जे मुनिबर परमारथबादी।। भरि लोचन रघुपतिहि निहारी। प्रेम मगन सब भए सुखारी।। रुदन करत देखीं सब नारी। गयउ बिभीषनु मन दुख भारी।। बंधु दसा बिलोकि दुख कीन्हा। तब प्रभु अनुजहि आयसु दीन्हा।। लछिमन तेहि बहु बिधि समुझायो। बहुरि बिभीषन प्रभु पहिं आयो।। कृपादृष्टि प्रभु ताहि बिलोका। करहु क्रिया परिहरि सब सोका।। कीन्हि क्रिया प्रभु आयसु मानी। बिधिवत देस काल जियँ जानी।।
— Rāmcharitamānas Laṅkā-Kāṇḍa entry 239 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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