🪷 Rāmcharitamānas · Laṅkā-Kāṇḍa · Entry 207

The Book of Laṅkā (the Yuddha) · Entry 207 of 273 · type: चौपाई

आवत देखि सक्ति अति घोरा। प्रनतारति भंजन पन मोरा।। तुरत बिभीषन पाछें मेला। सन्मुख राम सहेउ सोइ सेला।। लागि सक्ति मुरुछा कछु भई। प्रभु कृत खेल सुरन्ह बिकलई।। देखि बिभीषन प्रभु श्रम पायो। गहि कर गदा क्रुद्ध होइ धायो।। रे कुभाग्य सठ मंद कुबुद्धे। तैं सुर नर मुनि नाग बिरुद्धे।। सादर सिव कहुँ सीस चढ़ाए। एक एक के कोटिन्ह पाए।। तेहि कारन खल अब लगि बाँच्यो। अब तव कालु सीस पर नाच्यो।। राम बिमुख सठ चहसि संपदा। अस कहि हनेसि माझ उर गदा।।
— Rāmcharitamānas Laṅkā-Kāṇḍa entry 207 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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