🪷 Rāmcharitamānas · Laṅkā-Kāṇḍa · Entry 183

The Book of Laṅkā (the Yuddha) · Entry 183 of 273 · type: चौपाई

चलत होहिं अति असुभ भयंकर। बैठहिं गीध उड़ाइ सिरन्ह पर।। भयउ कालबस काहु न माना। कहेसि बजावहु जुद्ध निसाना।। चली तमीचर अनी अपारा। बहु गज रथ पदाति असवारा।। प्रभु सन्मुख धाए खल कैंसें। सलभ समूह अनल कहँ जैंसें।। इहाँ देवतन्ह अस्तुति कीन्ही। दारुन बिपति हमहि एहिं दीन्ही।। अब जनि राम खेलावहु एही। अतिसय दुखित होति बैदेही।। देव बचन सुनि प्रभु मुसकाना। उठि रघुबीर सुधारे बाना। जटा जूट दृढ़ बाँधै माथे। सोहहिं सुमन बीच बिच गाथे।। अरुन नयन बारिद तनु स्यामा। अखिल लोक लोचनाभिरामा।। कटितट परिकर कस्यो निषंगा। कर कोदंड कठिन सारंगा।।
— Rāmcharitamānas Laṅkā-Kāṇḍa entry 183 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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