🪷 Rāmcharitamānas · Laṅkā-Kāṇḍa · Entry 174

The Book of Laṅkā (the Yuddha) · Entry 174 of 273 · type: चौपाई

रे खल का मारसि कपि भालू। मोहि बिलोकु तोर मैं कालू।। खोजत रहेउँ तोहि सुतघाती। आजु निपाति जुड़ावउँ छाती।। अस कहि छाड़ेसि बान प्रचंडा। लछिमन किए सकल सत खंडा।। कोटिन्ह आयुध रावन डारे। तिल प्रवान करि काटि निवारे।। पुनि निज बानन्ह कीन्ह प्रहारा। स्यंदनु भंजि सारथी मारा।। सत सत सर मारे दस भाला। गिरि सृंगन्ह जनु प्रबिसहिं ब्याला।। पुनि सत सर मारा उर माहीं। परेउ धरनि तल सुधि कछु नाहीं।। उठा प्रबल पुनि मुरुछा जागी। छाड़िसि ब्रह्म दीन्हि जो साँगी।।
— Rāmcharitamānas Laṅkā-Kāṇḍa entry 174 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

Place in the Mānas

Navigation

🪷 जय श्री राम · जय गोस्वामी तुलसीदास 🪷