🪷 Rāmcharitamānas · Laṅkā-Kāṇḍa · Entry 160

The Book of Laṅkā (the Yuddha) · Entry 160 of 273 · type: चौपाई

तिन्हहि ग्यान उपदेसा रावन। आपुन मंद कथा सुभ पावन।। पर उपदेस कुसल बहुतेरे। जे आचरहिं ते नर न घनेरे।। निसा सिरानि भयउ भिनुसारा। लगे भालु कपि चारिहुँ द्वारा।। सुभट बोलाइ दसानन बोला। रन सन्मुख जा कर मन डोला।। सो अबहीं बरु जाउ पराई। संजुग बिमुख भएँ न भलाई।। निज भुज बल मैं बयरु बढ़ावा। देहउँ उतरु जो रिपु चढ़ि आवा।। अस कहि मरुत बेग रथ साजा। बाजे सकल जुझाऊ बाजा।। चले बीर सब अतुलित बली। जनु कज्जल कै आँधी चली।। असगुन अमित होहिं तेहि काला। गनइ न भुजबल गर्ब बिसाला।।
— Rāmcharitamānas Laṅkā-Kāṇḍa entry 160 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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