🪷 Rāmcharitamānas · Laṅkā-Kāṇḍa · Entry 131

The Book of Laṅkā (the Yuddha) · Entry 131 of 273 · type: चौपाई

महिष खाइ करि मदिरा पाना। गर्जा बज्राघात समाना।। कुंभकरन दुर्मद रन रंगा। चला दुर्ग तजि सेन न संगा।। देखि बिभीषनु आगें आयउ। परेउ चरन निज नाम सुनायउ।। अनुज उठाइ हृदयँ तेहि लायो। रघुपति भक्त जानि मन भायो।। तात लात रावन मोहि मारा। कहत परम हित मंत्र बिचारा।। तेहिं गलानि रघुपति पहिं आयउँ। देखि दीन प्रभु के मन भायउँ।। सुनु सुत भयउ कालबस रावन। सो कि मान अब परम सिखावन।। धन्य धन्य तैं धन्य बिभीषन। भयहु तात निसिचर कुल भूषन।। बंधु बंस तैं कीन्ह उजागर। भजेहु राम सोभा सुख सागर।।
— Rāmcharitamānas Laṅkā-Kāṇḍa entry 131 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

Place in the Mānas

Navigation

🪷 जय श्री राम · जय गोस्वामी तुलसीदास 🪷