🪷 Rāmcharitamānas · Laṅkā-Kāṇḍa · Entry 111

The Book of Laṅkā (the Yuddha) · Entry 111 of 273 · type: चौपाई

घायल बीर बिराजहिं कैसे। कुसुमित किंसुक के तरु जैसे।। लछिमन मेघनाद द्वौ जोधा। भिरहिं परसपर करि अति क्रोधा।। एकहि एक सकइ नहिं जीती। निसिचर छल बल करइ अनीती।। क्रोधवंत तब भयउ अनंता। भंजेउ रथ सारथी तुरंता।। नाना बिधि प्रहार कर सेषा। राच्छस भयउ प्रान अवसेषा।। रावन सुत निज मन अनुमाना। संकठ भयउ हरिहि मम प्राना।। बीरघातिनी छाड़िसि साँगी। तेज पुंज लछिमन उर लागी।। मुरुछा भई सक्ति के लागें। तब चलि गयउ निकट भय त्यागें।।
— Rāmcharitamānas Laṅkā-Kāṇḍa entry 111 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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