🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 746

The Book of Childhood · Entry 746 of 760 · type: चौपाई

मंगलगान करहिं बर भामिनि। भै सुखमूल मनोहर जामिनि।। अँचइ पान सब काहूँ पाए। स्त्रग सुगंध भूषित छबि छाए।। रामहि देखि रजायसु पाई। निज निज भवन चले सिर नाई।। प्रेम प्रमोद बिनोदु बढ़ाई। समउ समाजु मनोहरताई।। कहि न सकहि सत सारद सेसू। बेद बिरंचि महेस गनेसू।। सो मै कहौं कवन बिधि बरनी। भूमिनागु सिर धरइ कि धरनी।। नृप सब भाँति सबहि सनमानी। कहि मृदु बचन बोलाई रानी।। बधू लरिकनीं पर घर आईं। राखेहु नयन पलक की नाई।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 746 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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