🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 734

The Book of Childhood · Entry 734 of 760 · type: चौपाई

करहिं आरती बारहिं बारा। प्रेमु प्रमोदु कहै को पारा।। भूषन मनि पट नाना जाती।।करही निछावरि अगनित भाँती।। बधुन्ह समेत देखि सुत चारी। परमानंद मगन महतारी।। पुनि पुनि सीय राम छबि देखी।।मुदित सफल जग जीवन लेखी।। सखीं सीय मुख पुनि पुनि चाही। गान करहिं निज सुकृत सराही।। बरषहिं सुमन छनहिं छन देवा। नाचहिं गावहिं लावहिं सेवा।। देखि मनोहर चारिउ जोरीं। सारद उपमा सकल ढँढोरीं।। देत न बनहिं निपट लघु लागी। एकटक रहीं रूप अनुरागीं।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 734 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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