🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 732

The Book of Childhood · Entry 732 of 760 · type: चौपाई

मागध सूत बंदि नट नागर। गावहिं जसु तिहु लोक उजागर।। जय धुनि बिमल बेद बर बानी। दस दिसि सुनिअ सुमंगल सानी।। बिपुल बाजने बाजन लागे। नभ सुर नगर लोग अनुरागे।। बने बराती बरनि न जाहीं। महा मुदित मन सुख न समाहीं।। पुरबासिन्ह तब राय जोहारे। देखत रामहि भए सुखारे।। करहिं निछावरि मनिगन चीरा। बारि बिलोचन पुलक सरीरा।। आरति करहिं मुदित पुर नारी। हरषहिं निरखि कुँअर बर चारी।। सिबिका सुभग ओहार उघारी। देखि दुलहिनिन्ह होहिं सुखारी।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 732 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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