🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 730

The Book of Childhood · Entry 730 of 760 · type: चौपाई

धूप धूम नभु मेचक भयऊ। सावन घन घमंडु जनु ठयऊ।। सुरतरु सुमन माल सुर बरषहिं। मनहुँ बलाक अवलि मनु करषहिं।। मंजुल मनिमय बंदनिवारे। मनहुँ पाकरिपु चाप सँवारे।। प्रगटहिं दुरहिं अटन्ह पर भामिनि। चारु चपल जनु दमकहिं दामिनि।। दुंदुभि धुनि घन गरजनि घोरा। जाचक चातक दादुर मोरा।। सुर सुगन्ध सुचि बरषहिं बारी। सुखी सकल ससि पुर नर नारी।। समउ जानी गुर आयसु दीन्हा। पुर प्रबेसु रघुकुलमनि कीन्हा।। सुमिरि संभु गिरजा गनराजा। मुदित महीपति सहित समाजा।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 730 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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