🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 720

The Book of Childhood · Entry 720 of 760 · type: चौपाई

सबहि भाँति मोहि दीन्हि बड़ाई। निज जन जानि लीन्ह अपनाई।। होहिं सहस दस सारद सेषा। करहिं कलप कोटिक भरि लेखा।। मोर भाग्य राउर गुन गाथा। कहि न सिराहिं सुनहु रघुनाथा।। मै कछु कहउँ एक बल मोरें। तुम्ह रीझहु सनेह सुठि थोरें।। बार बार मागउँ कर जोरें। मनु परिहरै चरन जनि भोरें।। सुनि बर बचन प्रेम जनु पोषे। पूरनकाम रामु परितोषे।। करि बर बिनय ससुर सनमाने। पितु कौसिक बसिष्ठ सम जाने।। बिनती बहुरि भरत सन कीन्ही। मिलि सप्रेमु पुनि आसिष दीन्ही।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 720 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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