🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 712

The Book of Childhood · Entry 712 of 760 · type: चौपाई

सुक सारिका जानकी ज्याए। कनक पिंजरन्हि राखि पढ़ाए।। ब्याकुल कहहिं कहाँ बैदेही। सुनि धीरजु परिहरइ न केही।। भए बिकल खग मृग एहि भाँति। मनुज दसा कैसें कहि जाती।। बंधु समेत जनकु तब आए। प्रेम उमगि लोचन जल छाए।। सीय बिलोकि धीरता भागी। रहे कहावत परम बिरागी।। लीन्हि राँय उर लाइ जानकी। मिटी महामरजाद ग्यान की।। समुझावत सब सचिव सयाने। कीन्ह बिचारु न अवसर जाने।। बारहिं बार सुता उर लाई। सजि सुंदर पालकीं मगाई।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 712 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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